एक दिन जब हमारे कुछ दोस्तों में कही विदेश जाने की चर्चा होने लगी थी तब सब अपनी अपनी पसंद की बाहर की जगहों के नाम गिनाने लगे । फिर ज्यादातर दोस्तों ने एक शहर के बारे में बोला जो था मैड्रिड ( madrid)। फिर सब दोस्तों ने यह तय किया कि अगले दिन इसके बारे में खूब सारी जानकारियां एकत्र की जाएगी । इसके बाद सब दोस्तों ने मेरे इस शहर के बारे में काफ़ी अच्छी-खासी जानकारी एकत्र की जो इस प्रकार है :- मैड्रिड (madrid) स्पेन की राजधानी और सबसे अधिक आबादी वाला शहर है। मैड्रिड (madrid), देश और मैड्रिड (madrid)क्षेत्र के समुदाय दोनों के केंद्र में मंझनारेस (Manzanares) नदी पर स्थित है, स्पेन (spain) की राजधानी के रूप में, सरकार की सीट, स्पेनिश सम्राट का निवास, मैड्रिड देश का राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र भी है। यह समुद्र के स्तर से कुछ 2,120 फीट (646 मीटर) की ऊँचाई पर मेसेटा (स्पेनिश शब्द मेसा, "टेबल") से प्राप्त रेत और मिट्टी के एक अविच्छिन्न पठार पर स्थित है, जो इसे उच्चतम राजधानियों में से एक बनाता है। सिएरा डी गुआडरमा (Sierra de Guadarrama) की निकटता के साथ यह स्थान, ...
कुछ साल पहले की ही बात है मै एक कंपनी में कार्यरत था। उस कंपनी में सभी कर्मचारियों का स्वाभाव अच्छा था बस एक दो को छोड़कर। एक दिन मेरे साथ का एक कर्मचारी सौरभ बहुत परेशान था किसी बात को लेकर। मैंने पूछा कि क्या हुआ सौरभ किसी बात से तुम परेशान लग रहे हो और अगर बताने लायक मुझसे कोई बात हो तो बेझिझक बता सकते हो शायद मैं तुम्हारी कोई मदद कर सकूँ।
तब सौरभ बताता है कि अभी अभी घर से पता चला कि मेरे छोटे भाई को ब्लड कैंसर है और उसे ब्लड की बहुत आवश्यकता है। तब सौरभ बहुत ही उदास होकर कहता है कि अब ब्लड की व्यवस्था कहाँ से करूँ और कौन इतनी जल्दी तैयार होगा अपना ब्लड देने को। फिर मैं सौरभ से कहता हूं कि भाई मै तो तैयार हु अपना ब्लड देने को बाकि एक दो और को भी इसके लिए तैयार करते है। फिर मै सौरभ के कंधे पे हाथ रख के कहता हूं कि परेशान ना हो भाई सब ठीक होगा और तुम्हारा भाई जल्द से जल्द ठीक हो जायेगा।
थोड़ी देर में मैं अपने ऑफिस के दो चार लोगो को ब्लड देने के लिए तैयार करता हूं। अब सब जिस अस्पताल में सौरभ का भाई होता है वहां जाते है। वहां पहुंचते ही हम सब सबसे पहले रक्त दान का फॉर्म भरते है और इंतज़ार करते है। रक्तदान का मेरे लिए ये पहला अनुभव था और डर भी अंदर था कि कैसे क्या होगा।
तब सौरभ बताता है कि अभी अभी घर से पता चला कि मेरे छोटे भाई को ब्लड कैंसर है और उसे ब्लड की बहुत आवश्यकता है। तब सौरभ बहुत ही उदास होकर कहता है कि अब ब्लड की व्यवस्था कहाँ से करूँ और कौन इतनी जल्दी तैयार होगा अपना ब्लड देने को। फिर मैं सौरभ से कहता हूं कि भाई मै तो तैयार हु अपना ब्लड देने को बाकि एक दो और को भी इसके लिए तैयार करते है। फिर मै सौरभ के कंधे पे हाथ रख के कहता हूं कि परेशान ना हो भाई सब ठीक होगा और तुम्हारा भाई जल्द से जल्द ठीक हो जायेगा।
थोड़ी देर में मैं अपने ऑफिस के दो चार लोगो को ब्लड देने के लिए तैयार करता हूं। अब सब जिस अस्पताल में सौरभ का भाई होता है वहां जाते है। वहां पहुंचते ही हम सब सबसे पहले रक्त दान का फॉर्म भरते है और इंतज़ार करते है। रक्तदान का मेरे लिए ये पहला अनुभव था और डर भी अंदर था कि कैसे क्या होगा।
सबसे पहले हम लोगो ने अपना वजन नपाया उसके बाद ब्लड का सैंपल लिया गया।
फिर उसमे सब कुछ ठीक होने के बाद डॉक्टर के पास भेजा गया। डॉक्टर ने हम लोगो से एक एक करके कुछ सवाल पूछे उसके बाद हम लोगो को अंदर भेजा गया जहा पर ब्लड लिया जा रहा था। अंदर जैसे पहुंचे हम लोग तो एक मेरे साथ का कर्मचारी कहता है कि मैंने इससे पहले रक्तदान किया है तुम लोगो का पहली बार है तो डरना नहीं कुछ नहीं होता है। फिर जैसे ही हमलोग रक्तदान करके बाहर आते है तो सच में हम लोगो को कुछ भी रक्तदान का प्रभाव नहीं पड़ा और ना ही कोई कमजोरी लगी उसके बाद। और वहां पर कुछ लोग और आये थे जो कह रहे थे कि साल में एक बार तो वैसे भी रक्तदान दान कर देना चाहिए क्युकि इससे किसी का भला ही होता है और बहुतो की इससे जान बच जाती है। इस नेक कम को करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। तब उस अस्पताल में एक डॉक्टर मेरे भी जान पहचान के थे उन्होंने भी हमसे कहा कि वैसे तो रक्तदान तीन महीने के अंतराल में कर सकते है पर मैं फिर भी कहूंगा कि साल में दो बार जरूर रक्तदान करें। ये सब सुन के जैसे मुझे अपने आप पर थोड़ा गर्व होने लगा और मन ही मन में ये निश्चय किया कि किसी कि जरूरत पर और खुद से रक्तदान जरूर करूंगा।
उसके बाद सब जा के सौरभ और उसके छोटे भाई से मिले जहाँ पर उसके परिवार के कुछ और सदस्य भी थे। हम लोगो के ब्लड देने के बाद सौरभ के अंदर से जैसे कुछ परेशानी कम हुई फिर उसने हम लोगो का धन्यवाद किया। और फिर हम लोगो ने सौरभ को गले लगाया और कहा कि भाई सब ठीक हो जायेगा। फिर हम लोग अपने घर चले जाते है उसके बाद।
पता नहीं क्या था पर रक्तदान करने के बाद एक अलग ही ख़ुशी थी चेहरे पर जैसे बहुत ज्यादा ही अच्छा काम किया हो। उसके कुछ दिन बाद पता चलता है कि उसका भाई ठीक हो रहा है तब और ख़ुशी हुई ये सुनकर। उस दिन पता चला कि किसी की मदद करने में जो मजा है वो शायद ही किसी और चीज में हो।
फिर उसमे सब कुछ ठीक होने के बाद डॉक्टर के पास भेजा गया। डॉक्टर ने हम लोगो से एक एक करके कुछ सवाल पूछे उसके बाद हम लोगो को अंदर भेजा गया जहा पर ब्लड लिया जा रहा था। अंदर जैसे पहुंचे हम लोग तो एक मेरे साथ का कर्मचारी कहता है कि मैंने इससे पहले रक्तदान किया है तुम लोगो का पहली बार है तो डरना नहीं कुछ नहीं होता है। फिर जैसे ही हमलोग रक्तदान करके बाहर आते है तो सच में हम लोगो को कुछ भी रक्तदान का प्रभाव नहीं पड़ा और ना ही कोई कमजोरी लगी उसके बाद। और वहां पर कुछ लोग और आये थे जो कह रहे थे कि साल में एक बार तो वैसे भी रक्तदान दान कर देना चाहिए क्युकि इससे किसी का भला ही होता है और बहुतो की इससे जान बच जाती है। इस नेक कम को करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। तब उस अस्पताल में एक डॉक्टर मेरे भी जान पहचान के थे उन्होंने भी हमसे कहा कि वैसे तो रक्तदान तीन महीने के अंतराल में कर सकते है पर मैं फिर भी कहूंगा कि साल में दो बार जरूर रक्तदान करें। ये सब सुन के जैसे मुझे अपने आप पर थोड़ा गर्व होने लगा और मन ही मन में ये निश्चय किया कि किसी कि जरूरत पर और खुद से रक्तदान जरूर करूंगा।
पता नहीं क्या था पर रक्तदान करने के बाद एक अलग ही ख़ुशी थी चेहरे पर जैसे बहुत ज्यादा ही अच्छा काम किया हो। उसके कुछ दिन बाद पता चलता है कि उसका भाई ठीक हो रहा है तब और ख़ुशी हुई ये सुनकर। उस दिन पता चला कि किसी की मदद करने में जो मजा है वो शायद ही किसी और चीज में हो।




we should try forward on step towards blood donation. well done monster
ReplyDeleteThanks Awesome AB
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