एक दिन जब हमारे कुछ दोस्तों में कही विदेश जाने की चर्चा होने लगी थी तब सब अपनी अपनी पसंद की बाहर की जगहों के नाम गिनाने लगे । फिर ज्यादातर दोस्तों ने एक शहर के बारे में बोला जो था मैड्रिड ( madrid)। फिर सब दोस्तों ने यह तय किया कि अगले दिन इसके बारे में खूब सारी जानकारियां एकत्र की जाएगी । इसके बाद सब दोस्तों ने मेरे इस शहर के बारे में काफ़ी अच्छी-खासी जानकारी एकत्र की जो इस प्रकार है :- मैड्रिड (madrid) स्पेन की राजधानी और सबसे अधिक आबादी वाला शहर है। मैड्रिड (madrid), देश और मैड्रिड (madrid)क्षेत्र के समुदाय दोनों के केंद्र में मंझनारेस (Manzanares) नदी पर स्थित है, स्पेन (spain) की राजधानी के रूप में, सरकार की सीट, स्पेनिश सम्राट का निवास, मैड्रिड देश का राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र भी है। यह समुद्र के स्तर से कुछ 2,120 फीट (646 मीटर) की ऊँचाई पर मेसेटा (स्पेनिश शब्द मेसा, "टेबल") से प्राप्त रेत और मिट्टी के एक अविच्छिन्न पठार पर स्थित है, जो इसे उच्चतम राजधानियों में से एक बनाता है। सिएरा डी गुआडरमा (Sierra de Guadarrama) की निकटता के साथ यह स्थान, ...
राजनीति सबके बस की बात नहीं है ये तो सब जानते है पर कुछ लोग इसमें कदम किसी मज़बूरी की वजह से रखते है। ऐसे ही एक मेरा दोस्त प्रदीप जो बहुत ही डरपोक था। उसका किसी ने सोचा भी नहीं था कि वो भी राजनीति में कदम रखेगा। अभी इस समय वो किसी विश्वविद्यालय में छात्रनेता बन गया है। इसकी कहानी की शुरुआत ऐसे हुई.....
प्रदीप जब किसी बड़े विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने के बाद पहले दिन जब उसमे कदम रखता है तो उसे एक अजीब सा डर लगता है और मन ही मन ये सोचता है कि यहाँ कैसे पढ़ूंगा क्युकि शहर में वो पहली बार पढ़ाई करने आया होता है और बाकि की पढ़ाई उसने अपने गांव में ही करी होती है।
प्रदीप के घर में उसकी बड़ी बहन होती है जिसकी अभी शादी नहीं हुई है। बहन की शादी के लिए वो पढ़ाई के साथ साथ कुछ कमाई भी करने लगता है। साथ ही बताते है कि प्रदीप अभी कुछ ही दिन पहले अपने गांव से शहर आया हुआ होता है और वो एक रिश्तेदार के यहाँ रुका होता है। प्रदीप को जैसे ही वहां के छात्र देखते है तो हँसने लगते है उन लोगो की हंसी का कारण उसकी वेश भूषा थी। गांव में रहने के कारण प्रदीप की वेश भूषा बहुत साधारण थी। पर प्रदीप ने उन सब को अनदेखा करते हुए अपना पहला दिन जैसे तैसे बिताया। अगले दिन प्रदीप ये सोच रहा होता है कि यहाँ के लोग बहुत बेकार है इससे अच्छा तो मैं अपने गांव में था। तभी उसकी दोस्ती मुझसे होती है और फिर मै और मेरा दोस्त राहुल उसको समझाते है कि उन लोगो के हँसने की वजह से ज्यादा परेशान ना हो। हम लोगो से दोस्ती होने से प्रदीप का डर थोड़ा खत्म होता है। पर अगले ही दिन उसकी रैगिंग लेने कुछ लड़के आ जाते है अब वो सोच में पड़ जाता है कि अब क्या होगा। फिर जो लड़के रैगिंग लेने आये थे उनमे से एक बोला कि नाम बताओ अपना, तो प्रदीप अपना नाम बताता है। फिर उनमे से एक लड़का कहता है कि उधर एक लड़की दिख रही है उसको एक तमाचा मार के आओ तो प्रदीप मना कर देता है फिर वो लड़का प्रदीप को जोर का धक्का देता है और कहता है कि अगर तुमने इसको नहीं किया तो तुम्हे इससे भी बड़ा कुछ करने के लिए बोलूंगा तो चुपचाप ये करके आओ। उसके बाद प्रदीप डर जाता है और फिर वो हिम्मत जुटाता है। फिर उस लड़के का कहना मानकर सामने बैठी लड़की के पास जाता है। अब सभी लड़को की नज़र प्रदीप पर होती है तभी प्रदीप उस लड़की को बुलाता है और एक तमाचा जैसे ही मारता है उस लड़की को, उसके बाद वो लड़की और उसकी दोस्त मिलकर उसकी बहुत पिटाई करती है। जिसके बाद वो लड़के जोर जोर से हँसने लगते है और बेचारा प्रदीप मार खा के उदास हो के अपने घर चला जाता है।
अगले दिन वो लड़की प्रदीप से मिलती है और उससे पूछती है कि तुम तो देखने मे सीधे लगते हो तो फिर कल तुमने ये सब घटिया हरकत क्यों की। तो प्रदीप बताता है कि मैंने खुद से नहीं कुछ लड़के ने मुझसे कहा था ऐसा करने को। फिर प्रदीप उसके लिए माफ़ी मांगता है उस लड़की से, पर वो लड़की और उसकी दोस्त भी प्रदीप से माफ़ी मांगती है और कहती है कि हम लोगो ने भी गलत किया है। उसके बाद से प्रदीप की उस लड़की से दोस्ती हो जाती है। प्रदीप उसके बाद जो उसके साथ रैगिंग हुई वो सब हम लोगो से बताने लगा तो मैंने कहा कि यार इसमें हम लोग भी तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकते थे अगर हम लोग वहां होते भी क्युकि ये सब हम लोगो ने भी झेला है, एक बार तो इन लड़को ने हद ही कर दी थी एक लड़का, वो भी बहुत सीधा था, उसके सारे कपडे उतार के उसके सीने पर पारदर्शी शीशा रख कर उस पर एक बल्ब जला कर रख देते है अब उस बल्ब की गर्मी से शीशा काफ़ी गर्म हो चुका था जिसकी वजह से अब उसके बर्दाश्त के बाहर हो रहा था और उन लोगो ने उसके दोनों हाथ कसके पकड़ रखा था अब वो उस समय बहुत तड़प रहा था पर इन लोगो ने उसका हाथ नहीं छोड़ा फिर थोड़ी देर बाद जब उसके हाथ छोड़ते है तो वो शीशा जैसे उसके सीने से चिपक गया होता है और वो चिल्लाता है उसको हटाने के लिए पर उसकी कोई मदद नहीं करता है फिर थोड़ी देर बाद जैसे तैसे वो उस शीशे को हटाता है पर तब तक उसके सीने एक काला धब्बा पड़ गया होता है। तो ये लोग ऐसे है और इनके बारे में कोई कुछ नहीं बोलता है कोई इनकी शिकायत भी नहीं करता है इतना डर है इन लोगो का सबके दिल और दिमाग़ में। यहाँ तक कि इतना होने के बाद भी उस लड़के ने किसी से इन लड़को की शिकायत नहीं की थी।
आगे जारी है..................


Story attached with feelings.
ReplyDeletekeep it up.
Thanks Awesome AB
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