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मैड्रिड (madrid) शहर के बारे में

     एक दिन जब हमारे कुछ दोस्तों में कही विदेश जाने की चर्चा होने लगी थी तब सब अपनी अपनी पसंद की बाहर की जगहों के नाम गिनाने लगे । फिर ज्यादातर दोस्तों ने एक शहर के बारे में बोला जो था मैड्रिड ( madrid)। फिर सब दोस्तों ने यह तय किया कि अगले दिन इसके बारे में खूब सारी जानकारियां एकत्र की जाएगी । इसके बाद सब दोस्तों ने मेरे इस शहर के बारे में काफ़ी अच्छी-खासी जानकारी एकत्र की जो इस प्रकार है :- मैड्रिड (madrid) स्पेन की राजधानी और सबसे अधिक आबादी वाला शहर है। मैड्रिड (madrid), देश और मैड्रिड (madrid)क्षेत्र के समुदाय दोनों के केंद्र में मंझनारेस (Manzanares) नदी पर स्थित है, स्पेन (spain) की राजधानी के रूप में, सरकार की सीट, स्पेनिश सम्राट का निवास, मैड्रिड देश का राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र भी है। यह समुद्र के स्तर से कुछ 2,120 फीट (646 मीटर) की ऊँचाई पर मेसेटा (स्पेनिश शब्द मेसा, "टेबल") से प्राप्त रेत और मिट्टी के एक अविच्छिन्न पठार पर स्थित है, जो इसे उच्चतम राजधानियों में से एक बनाता है।  सिएरा डी गुआडरमा (Sierra de Guadarrama) की निकटता के साथ यह स्थान, ...

WRONG WAY PART 2

                  तब प्रदीप सोचता है कि उसके साथ जो हुआ उस लड़के की  अपेक्षा कम हुआ।

 पर प्रदीप का हाल कुछ दिन बाद भी वही रहा, सब उसका एक साल बाद भी मज़ाक बनाते  रहे और उसे अलग अलग नाम से बुला कर उसे परेशान किया करते थे। इन सब के बावजूद प्रदीप का खुद पर काबू अच्छा था जिसकी वजह से वह पहले साल की परीक्षा में पूरे कॉलेज में अव्वल आया था। जिसकी वजह से अब उसके दोस्त तो अभी भी कम ही थे पर दुश्मन और बढ़ गए थे। और कुछ ऐसे भी थे जो दोस्त होकर भी उसको परेशान किया करते थे। प्रदीप सिर्फ हमलोगो  से ही अपने दिल की बात साँझा किया करता था और हमलोग  भी उसको समझाने के अलावा कुछ मदद नहीं कर पा रहे थे। एक बार उसका मज़ाक कुछ लड़को ने उसकी पढ़ाई को लेकर उड़ाया और कहने लगे कि तू जो पढ़ाई करता है  वो सब रट के  करता है ऐसी पढ़ाई किसी काम  की नहीं होती है। तब प्रदीप को उस दिन सबसे  ज्यादा बुरा लगा था और उस दिन वो अंदर से टूट गया था और उसके दिल से यही आवाज आ रही थी कि अब बस! बहुत हो गया। अब उसका दिमाग़ जो शांत था उसने गुस्से की तरफ रुख कर लिया और अब उसके दिमाग़ में उन लोगो के लिए गुस्सा ही था  जिन्होंने उसका मज़ाक पिछले एक साल से  बनाया था। 

                   फिर अगला दिन, अगला दिन मानो प्रदीप ने अपने अंदर की सहनशक्ति को ख़त्म करके शुरुआत किया। अब उसने सोच लिया कि गंदगी को खत्म करने के लिए गंदगी में जाना पड़ेगा। अब वो हम लोगो से दोस्ती धीरे धीरे कम कर के उन लोगो के साथ दोस्ती करने लगा जो लोग मारपीट और गुंडागर्दी करते थे। अब वो भी उनमे शुमार  हो गया और हम लोगो से ही थोड़ा बहुत सही से बोल देता था बाकि से बात करना बंद कर दिया। फिर उसके बाद उसके मन में आया कि क्यों ना छात्रनेता बन जाया जाये। छात्रनेता बनने के लिए उसने अपनी पढ़ाई की क़ुरबानी दे दी, अब वह दूसरे साल की  परीक्षा को पास नहीं किया जानबूझकर ताकि उससे ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ सके। अब उसका नाम धीरे धीरे पूरे कॉलेज मे हो गया। अब उसके बाद उसका बड़े बड़े नेता लोगो से उसका संपर्क हो गया जिसकी वजह से उसका दमखम और रुतबा और बढ़ गया।
उसके बाद उसने छात्रनेता का चुनाव लड़ा और उसने उसमे अपनी जीत हासिल की। तब उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था और उसने उस दिन पूरे कॉलेज  में मिठाई बटवायी।
उसके कुछ दिन बाद हम लोगो ने सोचा उसको कॉल करके बधाई देते है क्युकि वो ज्यादा व्यस्त  था जिसकी वजह से मिल नहीं पा रहा था। तो उसने हम लोगो की कॉल को नहीं उठाया और उसके बाद दुबारा उसने कॉल भी नहीं की। प्रदीप पहले जो था वो अब हम लोगो के लिए भी बदल गया था। फिर हम लोगो ने सोचा कि उसने अब एक गलत रास्ता चुन लिया है जिसका अंत बहुत बुरा होता है। 
             पर प्रदीप ने जो भी रास्ता चुना उस समय उसके लिए उसको वही ठीक लगा क्युकि वो बहुत ही परेशान हो गया था और मजबूर भी था ऐसा कदम उठाने के लिए। अब आज उसके लिए उसके मुँह पर कोई उसकी बेइज्जती  नहीं कर सकता है  ये प्रदीप के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि  थी पर गलत रास्ता तो आखिर गलत ही होता है फिर वो चाहे जो भी हो। 

Comments

  1. A small thoughts can change all life and behaviour of humen being like your story character Pradeep.

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