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Showing posts from July, 2020

मैड्रिड (madrid) शहर के बारे में

     एक दिन जब हमारे कुछ दोस्तों में कही विदेश जाने की चर्चा होने लगी थी तब सब अपनी अपनी पसंद की बाहर की जगहों के नाम गिनाने लगे । फिर ज्यादातर दोस्तों ने एक शहर के बारे में बोला जो था मैड्रिड ( madrid)। फिर सब दोस्तों ने यह तय किया कि अगले दिन इसके बारे में खूब सारी जानकारियां एकत्र की जाएगी । इसके बाद सब दोस्तों ने मेरे इस शहर के बारे में काफ़ी अच्छी-खासी जानकारी एकत्र की जो इस प्रकार है :- मैड्रिड (madrid) स्पेन की राजधानी और सबसे अधिक आबादी वाला शहर है। मैड्रिड (madrid), देश और मैड्रिड (madrid)क्षेत्र के समुदाय दोनों के केंद्र में मंझनारेस (Manzanares) नदी पर स्थित है, स्पेन (spain) की राजधानी के रूप में, सरकार की सीट, स्पेनिश सम्राट का निवास, मैड्रिड देश का राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र भी है। यह समुद्र के स्तर से कुछ 2,120 फीट (646 मीटर) की ऊँचाई पर मेसेटा (स्पेनिश शब्द मेसा, "टेबल") से प्राप्त रेत और मिट्टी के एक अविच्छिन्न पठार पर स्थित है, जो इसे उच्चतम राजधानियों में से एक बनाता है।  सिएरा डी गुआडरमा (Sierra de Guadarrama) की निकटता के साथ यह स्थान, ...

स्पेनिश (spanish) से दोस्ती

                 ये कहानी मेरी एक दोस्त के ऊपर है जो मेक्सिको (Mexico) में रहती थी और उसका स्वाभाव काफ़ी अच्छा था। मुझे उसका स्वाभाव इतना अच्छा लगा था कि मैं ये सोच रहा था कि ये लड़की हमारे देश की कई लड़कियों के स्वाभाव के मामले में बहुत आगे है।                  मेरी उससे दोस्ती एक बहुत ही अच्छे एप्लीकेशन (application) के जरिये हुई थी। अब उससे बात करने में थोड़ी कठिनाई तो होती थी क्युकि मुझसे वो स्पेनिश (spanish) भाषा में बात करती थी। अब मुझे उसकी भाषा को पहले अपनी भाषा में अनुवाद करना पड़ता था फिर उसको जवाब देने के लिए अपनी भाषा को स्पेनिश (spanish) में अनुवाद करना पड़ता था। कुछ दिन बात करने से वो भी मुझसे रोजाना उसी एप्लीकेशन (application) पर हालचाल लेने आ जाया करती थी। अब उसको भी मुझसे भी बात करना अच्छा लगने लगा था पर वो बार बार पूछती थी कि तुम्हारा जवाब इतनी देर में क्यों आता है?  उसका ये सवाल इसलिए था क्युकि उसे मैंने कहा था कि मुझे स्पेनिश (spanish) बहुत अच्छे से आती है। पर उस समय मेरे सा...

Blood donation ( रक्तदान )

               कुछ साल पहले की ही बात है मै एक कंपनी में कार्यरत था। उस कंपनी  में सभी कर्मचारियों का स्वाभाव  अच्छा था बस एक दो को छोड़कर। एक दिन मेरे साथ का एक कर्मचारी सौरभ बहुत परेशान था किसी बात को लेकर। मैंने पूछा कि क्या हुआ सौरभ किसी बात से तुम परेशान  लग रहे हो और अगर बताने लायक मुझसे कोई बात हो तो बेझिझक बता सकते हो शायद मैं तुम्हारी कोई मदद कर सकूँ। तब सौरभ बताता है कि अभी अभी घर से पता चला कि मेरे छोटे भाई को ब्लड कैंसर है और उसे ब्लड की बहुत आवश्यकता है। तब सौरभ बहुत ही उदास होकर कहता है कि अब ब्लड की व्यवस्था कहाँ  से करूँ और कौन इतनी जल्दी तैयार होगा अपना ब्लड देने को। फिर मैं सौरभ से कहता हूं कि  भाई मै तो तैयार हु अपना ब्लड देने को बाकि एक दो और को भी इसके लिए तैयार करते है। फिर मै सौरभ के कंधे पे हाथ रख के कहता हूं कि परेशान ना हो भाई सब ठीक होगा और तुम्हारा भाई  जल्द से जल्द ठीक हो जायेगा।                    थोड़ी देर में मैं अपने ऑफिस के दो चार...

A small mistake (एक छोटी गलती )

                   ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के कारण बचपन से ही पाप, पुण्य, नीति, अनीति, सदाचार, दुराचार आदि चीज़ो के बारे में ज्ञान दिया जाने लगा। फिर बचपन से ही ये सब सुनने से मन मे एक बात तो आ गयी कि अगर गलत करेंगे तो सजा तो जरूर मिलेगी चाहे वो किसी रूप मे हो।                 मेरी उम्र उस समय बारह साल रही होंगी और उस समय तक छोटी छोटी चीज़ो का इतना ज्ञान आ गया था कि किसी को परेशान करेंगे तो भगवान कि नज़र में वो गलत ही होगा। उस समय क्रिकेट  खेलने में मुझे बहुत मज़ा आती थी। एक मैदान जहाँ से मैंने क्रिकेट  खेलने की शुरुआत की वो मेरे घर के पास में था। और रोजाना शाम को अपने दोस्तों के साथ स्कूल  से आने के बाद उस मैदान पर क्रिकेट  खेलने जाया करता था। पर कुछ ही दिन उस मैदान पर क्रिकेट  खेल पाए उसके बाद उस मैदान को उस समय की सरकार ने अपने अधीन कर लिया। तब हम लोग सोचने लगे की अब कहा जाये क्रिकेट खेलने क्युकि अब तक आदत हो गयी थी और बिना खेले अब हम लोगो का समय ना बीते। फिर हम ...

WRONG WAY PART 2

                  तब प्रदीप सोचता है कि उसके साथ जो हुआ उस लड़के की  अपेक्षा कम हुआ।  पर प्रदीप का हाल कुछ दिन बाद भी वही रहा, सब उसका एक साल बाद भी मज़ाक बनाते  रहे और उसे अलग अलग नाम से बुला कर उसे परेशान किया करते थे। इन सब के बावजूद प्रदीप का खुद पर काबू अच्छा था जिसकी वजह से वह पहले साल की परीक्षा में पूरे कॉलेज में अव्वल आया था। जिसकी वजह से अब उसके दोस्त तो अभी भी कम ही थे पर दुश्मन और बढ़ गए थे। और कुछ ऐसे भी थे जो दोस्त होकर भी उसको परेशान किया करते थे। प्रदीप सिर्फ हमलोगो  से ही अपने दिल की बात साँझा किया करता था और हमलोग  भी उसको समझाने के अलावा कुछ मदद नहीं कर पा रहे थे। एक बार उसका मज़ाक कुछ लड़को ने उसकी पढ़ाई को लेकर उड़ाया और कहने लगे कि तू जो पढ़ाई करता है  वो सब रट के  करता है ऐसी पढ़ाई किसी काम  की नहीं होती है। तब प्रदीप को उस दिन सबसे  ज्यादा बुरा लगा था और उस दिन वो अंदर से टूट गया था और उसके दिल से यही आवाज आ रही थी कि अब बस! बहुत हो गया। अब उसका दिमाग़ जो शांत था उसने गुस्से की ...

WRONG WAY PART 1

          राजनीति सबके बस की बात नहीं है ये तो सब जानते है पर कुछ लोग इसमें कदम किसी मज़बूरी की वजह से रखते है। ऐसे ही एक मेरा दोस्त प्रदीप जो बहुत ही डरपोक था। उसका किसी ने सोचा भी नहीं था कि वो भी राजनीति  में कदम रखेगा। अभी इस समय वो किसी विश्वविद्यालय में छात्रनेता बन गया है। इसकी कहानी की शुरुआत ऐसे हुई.....                  प्रदीप जब किसी बड़े विश्वविद्यालय में प्रवेश  लेने के बाद पहले दिन जब उसमे कदम रखता है तो उसे एक अजीब सा डर लगता है और मन ही मन ये सोचता है कि  यहाँ कैसे पढ़ूंगा क्युकि शहर में वो पहली बार पढ़ाई करने आया होता है और बाकि की पढ़ाई उसने अपने गांव में ही करी  होती है।  प्रदीप के घर में उसकी बड़ी बहन होती है जिसकी अभी शादी नहीं हुई  है। बहन की शादी के लिए वो पढ़ाई के साथ साथ कुछ कमाई भी करने लगता है। साथ ही बताते है कि प्रदीप अभी कुछ ही दिन पहले अपने गांव से शहर आया हुआ होता है और वो एक रिश्तेदार के यहाँ रुका होता है। प्रदीप को जैसे ही वहां के छात्र देखते है तो हँसने लगते ह...

SCARY SHORT STORY

                एक सपना जो मैंने काफ़ी समय पहले देखा था वो देखने मे तो डरावना था पर एक सकारात्मक सन्देश भी देता है। उस सपने की शुरुआत  कुछ यूँ हुई........                      एक जंगल में एक झोपडी दिखाई  देती है जिसमे तीन लोग एक लड़का और उसके माँ बाप दिखाई देते है।  लड़के की उम्र यही कोई तेरह-चौदह साल होंगी। लड़के का बाप रोज़ाना जंगल से लकड़ियां लाता था पर एक दिन उसकी तबियत ख़राब हो गयी तो उसने अपने लड़के से कहा कि जाओ बेटा जंगल से लकड़िया ले आओ आज मेरी कुछ तबियत ठीक नहीं है और ज्यादा दूर ना जाना। तभी वो लड़का कहता है ठीक है पिताजी। तभी कुछ देर बाद वो लड़का जंगल की ओर  निकलता है लकड़ियां लेने के लिए। पर वो लड़का लकड़ियां  ढूंढ़ते ढूंढ़ते थोड़ी दूर  निकल गया और इधर धीरे धीरे रात होने लगी थी।  और वो लड़का रात होने की वजह से काफ़ी ज्यादा डर गया था। अब वो सिर्फ ये सोच रहा था कि जल्दी से जल्दी घर पहुचे लकड़ियां ले के। फिर वो जैसे तैसे लकड़ियों को इक्क्ठा करके ले जाने लगा तभी उसको एक औ...

MISUNDERSTANDING

             स्कूल के  समय में मेरा एक मित्र हुआ करता था जिसका नाम था अभय। अभय का स्वभाव काफ़ी अच्छा था। एक दिन जब वो मेरे बगल मैं बैठा था तो वो उस दिन थोड़ा उदास लग रहा था तब मैंने उससे पूछा कि क्या हुआ अभय कोई बात। तो उसने कहा नहीं भाई। फिर मैंने देखा कि उसका पैर कांप रहा था। तब मुझसे रहा नहीं गया और पूछा कि क्या हुआ भाई बताओ। तो वो बताता है कि यार कल मै बहुत मारा गया कुछ लड़को से। तब मैंने पूछ क्यों अभय क्या हुआ तुमने कुछ किया था क्या। तो बताने लगा कि मैं स्कूल में एक लड़की है उससे बात करता हूं तो कल मै स्कूल नहीं आया था। और मै क्रिकेट  खेलने एक मैदान में गया था तो वहां पर कुछ लड़के आये और कहने लगे कि तुम इस लड़की से बात करते हो। तब मैंने कहा हाँ करता हु क्या हुआ।  MISUNDERSTANDING तो जो लड़के आये थे वो मुझे घेर लिए और फिर एक ने मुझे जोर का तमाचा  मारा फिर मैं भी उनसे लड़ने लगा तो सबने मिलके मुझे बहुत मारा। तो उसी वजह से मेरे शरीर में बहुत दर्द हो रहा है और कांप भी रहा है।                 ...

A smart women part 4