एक दिन जब हमारे कुछ दोस्तों में कही विदेश जाने की चर्चा होने लगी थी तब सब अपनी अपनी पसंद की बाहर की जगहों के नाम गिनाने लगे । फिर ज्यादातर दोस्तों ने एक शहर के बारे में बोला जो था मैड्रिड ( madrid)। फिर सब दोस्तों ने यह तय किया कि अगले दिन इसके बारे में खूब सारी जानकारियां एकत्र की जाएगी । इसके बाद सब दोस्तों ने मेरे इस शहर के बारे में काफ़ी अच्छी-खासी जानकारी एकत्र की जो इस प्रकार है :- मैड्रिड (madrid) स्पेन की राजधानी और सबसे अधिक आबादी वाला शहर है। मैड्रिड (madrid), देश और मैड्रिड (madrid)क्षेत्र के समुदाय दोनों के केंद्र में मंझनारेस (Manzanares) नदी पर स्थित है, स्पेन (spain) की राजधानी के रूप में, सरकार की सीट, स्पेनिश सम्राट का निवास, मैड्रिड देश का राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र भी है। यह समुद्र के स्तर से कुछ 2,120 फीट (646 मीटर) की ऊँचाई पर मेसेटा (स्पेनिश शब्द मेसा, "टेबल") से प्राप्त रेत और मिट्टी के एक अविच्छिन्न पठार पर स्थित है, जो इसे उच्चतम राजधानियों में से एक बनाता है। सिएरा डी गुआडरमा (Sierra de Guadarrama) की निकटता के साथ यह स्थान, ...
उस दिन मुझे एक प्रतियोगी परीक्षा के लिए कानपुर जाना था। कानपुर जाने के लिए मैं जैसे ही निकलने वाला था तभी सामने वाले घर से किसी के छींकने की आवाज आयी। तब मेरे माता-पिता मुझे थोड़ा रुक कर घर से निकलने के लिए कहने लगे। पर मै इन सब चीज़ो में उस समय विश्वास नहीं करता था पर माता-पिता ने रोका तो उनके कहने से थोड़ी देर बाद ही घर के लिए निकला।
परीक्षा सुबह दस बजे थी और लखनऊ से कानपुर ट्रेन (train) से जाने में डेढ़ से दो घंटे का समय लगता था। अब मैं घर से निकलने के बाद स्टेशन पर सात बजकर बीस मिनट पर टिकट (ticket) के साथ, एक ट्रेन (train) आने वाली थी, उसका इंतज़ार कर रहा था। फिर अचानक से घोषणा होती है कि लखनऊ से कानपुर वाली ट्रेन आधे घंटे लेट ( late) है। फिर मैं ये सुनकर सोच में पड़ गया कि कानपुर में परीक्षा का केंद्र ( centre) स्टेशन (station) से ना जाने कितनी दूर होगा।
अब सब कुछ ट्रेन पर निर्धारित था अगर जल्दी आ गयी तो समय पर परीक्षा देने को मिल जायेगा नहीं तो लेट ( late) होने पर परीक्षा नहीं दे पायंगे। फिर जब ट्रेन (train) आती है तो उसमे काफ़ी ज्यादा भीड़ रहती है जैसे तैसे मुझे उसमे बैठने को मिलता है काफ़ी मशक्कत के बाद। फिर ठीक सुबह के आठ बजे ट्रेन (train) चलती है और उसके बाद मै उस ट्रेन (train) से ठीक साढ़े नौ बजे कानपुर पहुंच जाता हूं, अब मेरे पास आधे घंटे का ही समय बचा था परीक्षा-केंद्र पहुंचने में उसके बाद मुझे उसमे अंदर जाने की अनुमति ना मिलती। फिर मैंने कानपुर (kanpur) के स्टेशन (station) से ऑटो (auto) किया और ऑटो (auto) चालक से कहा कि भाई दस बजे के थोड़ा पहले मेरे परीक्षा-केंद्र के पते पर पंहुचा देना और मैंने उससे ये भी कह दिया कि परीक्षा-केंद्र पर सही समय पर पहुंचने पर मैं आपको थोड़े ज्यादा पैसे भी दे दूंगा।
फिर उसने कहा कि भाई तुम्हरे परीक्षा-केंद्र के पते पर पहुंचने में कम से कम एक घंटा लग जायेगा क्युकि थोड़ा बीच में सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है। अब ये सुन के मेरे पैरो तले जमीन खिसक गयी और मैंने फिर पूछा कि भाई कोई और रास्ता नहीं है क्या तो उसने कहा नहीं भाई। अब मेरी कुछ समझ मे नहीं आ रहा था कि क्या करें। फिर मैंने सोचा कि परीक्षा केंद्र पर एक बार जा कर देख लें क्या पता कुछ निवेदन से अंदर जाने कि अनुमति मिल जाये फिर मैंने ऑटो (auto) चालक से कहा कि भाई चलो ! और थोड़ा जल्दी ही करना फिर उसने कहा ठीक है। अब वो मुझे दस बजकर बीस मिनट पर परीक्षा केंद्र से एक किलोमीटर दूर छोड़ देता है और कहता इसके बाद अब आपको दूसरा ऑटो करना पड़ेगा यहाँ से। फिर मैं पूरी तरह से निराश हो जाता हूं और उस ऑटो(auto) चालक से कहता हूं कि अब रहने दो भाई मुझे वापस स्टेशन छोड़ दो। अब मैं पूरे रास्ते निराश मन से यही सोचता रहा कि क्या ये सब उस छींक की वजह से हुआ है जिसको लोग कहते है कि किसी की छींक अशुभ होती है जब आप कुछ करने चले तब।
परीक्षा सुबह दस बजे थी और लखनऊ से कानपुर ट्रेन (train) से जाने में डेढ़ से दो घंटे का समय लगता था। अब मैं घर से निकलने के बाद स्टेशन पर सात बजकर बीस मिनट पर टिकट (ticket) के साथ, एक ट्रेन (train) आने वाली थी, उसका इंतज़ार कर रहा था। फिर अचानक से घोषणा होती है कि लखनऊ से कानपुर वाली ट्रेन आधे घंटे लेट ( late) है। फिर मैं ये सुनकर सोच में पड़ गया कि कानपुर में परीक्षा का केंद्र ( centre) स्टेशन (station) से ना जाने कितनी दूर होगा।
अब सब कुछ ट्रेन पर निर्धारित था अगर जल्दी आ गयी तो समय पर परीक्षा देने को मिल जायेगा नहीं तो लेट ( late) होने पर परीक्षा नहीं दे पायंगे। फिर जब ट्रेन (train) आती है तो उसमे काफ़ी ज्यादा भीड़ रहती है जैसे तैसे मुझे उसमे बैठने को मिलता है काफ़ी मशक्कत के बाद। फिर ठीक सुबह के आठ बजे ट्रेन (train) चलती है और उसके बाद मै उस ट्रेन (train) से ठीक साढ़े नौ बजे कानपुर पहुंच जाता हूं, अब मेरे पास आधे घंटे का ही समय बचा था परीक्षा-केंद्र पहुंचने में उसके बाद मुझे उसमे अंदर जाने की अनुमति ना मिलती। फिर मैंने कानपुर (kanpur) के स्टेशन (station) से ऑटो (auto) किया और ऑटो (auto) चालक से कहा कि भाई दस बजे के थोड़ा पहले मेरे परीक्षा-केंद्र के पते पर पंहुचा देना और मैंने उससे ये भी कह दिया कि परीक्षा-केंद्र पर सही समय पर पहुंचने पर मैं आपको थोड़े ज्यादा पैसे भी दे दूंगा।
फिर उसने कहा कि भाई तुम्हरे परीक्षा-केंद्र के पते पर पहुंचने में कम से कम एक घंटा लग जायेगा क्युकि थोड़ा बीच में सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है। अब ये सुन के मेरे पैरो तले जमीन खिसक गयी और मैंने फिर पूछा कि भाई कोई और रास्ता नहीं है क्या तो उसने कहा नहीं भाई। अब मेरी कुछ समझ मे नहीं आ रहा था कि क्या करें। फिर मैंने सोचा कि परीक्षा केंद्र पर एक बार जा कर देख लें क्या पता कुछ निवेदन से अंदर जाने कि अनुमति मिल जाये फिर मैंने ऑटो (auto) चालक से कहा कि भाई चलो ! और थोड़ा जल्दी ही करना फिर उसने कहा ठीक है। अब वो मुझे दस बजकर बीस मिनट पर परीक्षा केंद्र से एक किलोमीटर दूर छोड़ देता है और कहता इसके बाद अब आपको दूसरा ऑटो करना पड़ेगा यहाँ से। फिर मैं पूरी तरह से निराश हो जाता हूं और उस ऑटो(auto) चालक से कहता हूं कि अब रहने दो भाई मुझे वापस स्टेशन छोड़ दो। अब मैं पूरे रास्ते निराश मन से यही सोचता रहा कि क्या ये सब उस छींक की वजह से हुआ है जिसको लोग कहते है कि किसी की छींक अशुभ होती है जब आप कुछ करने चले तब।




I think it is only superstition. and it is only belief..but incident is real..
ReplyDelete