एक दिन जब हमारे कुछ दोस्तों में कही विदेश जाने की चर्चा होने लगी थी तब सब अपनी अपनी पसंद की बाहर की जगहों के नाम गिनाने लगे । फिर ज्यादातर दोस्तों ने एक शहर के बारे में बोला जो था मैड्रिड ( madrid)। फिर सब दोस्तों ने यह तय किया कि अगले दिन इसके बारे में खूब सारी जानकारियां एकत्र की जाएगी । इसके बाद सब दोस्तों ने मेरे इस शहर के बारे में काफ़ी अच्छी-खासी जानकारी एकत्र की जो इस प्रकार है :- मैड्रिड (madrid) स्पेन की राजधानी और सबसे अधिक आबादी वाला शहर है। मैड्रिड (madrid), देश और मैड्रिड (madrid)क्षेत्र के समुदाय दोनों के केंद्र में मंझनारेस (Manzanares) नदी पर स्थित है, स्पेन (spain) की राजधानी के रूप में, सरकार की सीट, स्पेनिश सम्राट का निवास, मैड्रिड देश का राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र भी है। यह समुद्र के स्तर से कुछ 2,120 फीट (646 मीटर) की ऊँचाई पर मेसेटा (स्पेनिश शब्द मेसा, "टेबल") से प्राप्त रेत और मिट्टी के एक अविच्छिन्न पठार पर स्थित है, जो इसे उच्चतम राजधानियों में से एक बनाता है। सिएरा डी गुआडरमा (Sierra de Guadarrama) की निकटता के साथ यह स्थान, ...
उस दिन को याद करके आज भी रूह कांप जाती है। पर वो दिन मेरे लिए इस कदर दिल और दिमाग़ में बैठ गया कि जिसे मरते दम तक उसको भुलाया नहीं जा सकता है। पर कहा जाता है जिसके साथ भगवान है उसको कुछ नहीं हो सकता है। तो उस दिन क्या हुआ आगे बताते है......
उस दिन सुबह जब आंख खुली तो डर के साथ खुली क्युकि एक डरावना सपना देख रहा था। सपने में देखा कि मै एक गली में अकेले घूम रहा हुँ। गली बहुत ही सकरी और बहुत ही ज्यादा मोड़दार है। थोड़ी दूर चलते ही एक मोड़ आता है उस पर एक रिक्शेवाला मिलता है जो कहता है कि आगे एक मोड़ है उधर ना जाना। उस समय मै उसकी बात को अनसुना करते हुए आगे बढ़ जाता हुँ। और जैसे ही उस मोड़ के पास पहुँचता हुँ कि तभी एक औरत दिखाई देती है।
उस औरत की शक्ल अंधेरा होने के कारण कुछ समझ में नहीं आता है। और उसको देखने के लिए मैं जैसे ही अपना एक कदम आगे बढ़ता हूं तभी थोड़ी सी रौशनी मैं एक ॐ का लॉकेट पहने होता हु उस पर पड़ती है जिससे वो लॉकेट चमकने लगता है।
और उसके चमकते ही वो औरत अपना मुँह पीछे करके भागने लगती है। और जब वो भागती है तो उसके कदमो की चाल इतनी तेज़ होती है जिसे देख कर मुझे एक अजीब सा डर लगने लगता है। और उसी डर के कारण ही मेरी आंखें खुल जाती है। और मैं उस डर के साथ अपने दिन की शुरुआत करता हूं।
उस दिन ऑफिस से घर के लिए थोड़ा देर से निकला और रात ज्यादा हो गयी थी। सडक पे दो चार ही लोग दिख रहे थे। पूरे दिन वो सुबह का सपना याद नहीं आया पर जब ऑफिस से घर आ रहा था तो जैसा माहौल था उससे वो सपना मेरी नज़र के सामने अचानक से आ गया। और आज मैं मेरे ऑफिस के दोस्त ने एक सीधा और सरल मार्ग मेरे घर का बताया था तो उसी रास्ते से जा रहा था पता नहीं क्या सोचा के। फिर उसने जो रास्ता मुझे बताया हूबहू उस सपने की तरह दिखने लगा। अब मेरे अंदर डर इस कदर बढ़ रहा था कि दिमाग़ ने पूरी तरह काम करना बंद कर दिया।
और मैं आगे चला जा रहा था भगवान का नाम ले के। तभी थोड़ी दूर पे एक औरत दिखी मुझे जिसके बाल खुले हुए थे। अब तो जैसे दिल कि धड़कन रुकने ही वाली थी फिर मै जैसे ही उसके पास से गुज़रा तो उसने मुझसे कहा तुम्हरा समय अभी नहीं आया है। ये सुनकर जैसे मुझे एक धक्का सा लगा। और घर पहुंचने के बाद भी उसकी वो बात वो आवाज़ मेरे कानों में गूंजती रही। फिर मैं जैसे तैसे उस बात को कुछ देर के लिए भुला कर सोया।
फिर सुबह उठते ही पता चला कि जिस गली से मैं आया था रात में उधर किसी की मौत हो चुकी है।
ये सुनते ही मेरे कान खड़े हो गए और आंखें खुली की खुली रह गयी। और तब मुझे लगा कि वो औरत जो रात में मुझे मिली वो किसी की मौत बनके आयी थी तभी मुझसे कह रही थी कि अभी तुम्हारा समय नहीं आया है। इस घटना से वो दिन एक डर के रूप में मेरे दिमाग़ मे बैठ गया जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता हूं।





nice story bro. keep it up
ReplyDeleteThnks bro
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